मनीकंट्रोल.कॉम के अनुसार, भारत ने रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले एक नए अमेरिकी कानून को लेकर चिंता व्यक्त की है, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों और ऊर्जा बाजारों पर इसके संभावित प्रभाव का हवाला दिया गया है। ये चिंताएं भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक टेलीफोन कॉल के बाद उठाई गईं, जो अमेरिकी कांग्रेस द्वारा नया कानून पारित किए जाने के बाद पहली ऐसी बातचीत थी।
द हिंदू.कॉम के अनुसार, कॉल के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत को "सार्थक" बताया और कहा कि उन्होंने और राष्ट्रपति ट्रंप ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की। टाइम्स ऑफ इंडिया.इंडियाटाइम्स.कॉम के अनुसार, प्रधानमंत्री ने अमेरिका के रूस कानून को लेकर भी चिंताएं जताईं।
प्रतिबंध कानून और राजनयिक वार्ताओं का विवरण
द हिंदू.कॉम के अनुसार, नया कानून, जिसे लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शंस अगेंस्ट रूस एंड ईरान एक्ट (एसआरआईएल) के नाम से जाना जाता है, राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों से आयातित वस्तुओं पर 100% तक शुल्क लगाने का अधिकार देता है जो रूसी तेल का आयात जारी रखते हैं, जिनमें भारत और चीन भी शामिल हैं।
द हिंदू.कॉम के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच हुई। यह कॉल उच्च-स्तरीय राजनयिक वार्ताओं की एक श्रृंखला के बाद हुई, जहाँ भारतीय अधिकारियों ने एसआरआईएल को लेकर अपनी आशंकाएं व्यक्त की थीं:
- विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ बातचीत की।
- विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने अमेरिकी अवर विदेश मंत्री एलिसन हुकर से मुलाकात की।
दोनों बैठकें संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के इतर हुईं, जहाँ भारतीय अधिकारियों ने विशेष रूप से एसआरआईएल को लेकर चिंताएं उठाईं। द हिंदू.कॉम के अनुसार, इसके अलावा, श्री मिसरी ने इस सप्ताह की शुरुआत में दिल्ली यात्रा के दौरान एक अमेरिकी कांग्रेसी प्रतिनिधिमंडल के साथ भी इन मुद्दों पर चर्चा की।
एक सोशल मीडिया पोस्ट में, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्होंने और राष्ट्रपति ट्रंप ने विभिन्न क्षेत्रों में भारत-अमेरिका सहयोग पर चर्चा की। श्री मोदी ने लिखा, "हमने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और अन्य क्षेत्रों में अपने द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की।" उन्होंने आगे कहा, "हमने अपनी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए घनिष्ठ जुड़ाव बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की। हमने वैश्विक शांति और सुरक्षा को आगे बढ़ाने के लिए चल रहे प्रयासों सहित क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।" द हिंदू.कॉम के अनुसार, हालांकि, प्रधानमंत्री की पोस्ट में एसआरआईएल का सीधा उल्लेख नहीं था।
द्विपक्षीय मुद्दों का संदर्भ और पृष्ठभूमि
नेताओं और उनके शीर्ष राजनयिकों के बीच हालिया चर्चाएं ऐसे समय में हुई हैं जब भारत-अमेरिका संबंध कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी में बोलते हुए, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्वीकार किया कि नई दिल्ली के वाशिंगटन के साथ कई लंबित मुद्दे हैं। द हिंदू.कॉम के अनुसार, उन्होंने कहा कि जहां भारत की अपनी चुनौतियां हैं, वहीं "दुनिया के अधिकांश देशों के अमेरिका के साथ अधिक कठिन संबंध रहे हैं।"
श्री जयशंकर ने भारत के लिए चिंता के कई विशिष्ट क्षेत्रों को रेखांकित किया:
- टैरिफ और मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) वार्ता: मंत्री ने एफटीए वार्ताओं को "जटिल" बताया, जिसमें भारत और अमेरिका के बीच प्रति व्यक्ति आय में लगभग 30 गुना अंतर, साथ ही कृषि आवश्यकताओं और उत्पादन क्षमताओं में भिन्नता का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि वार्ताओं की गति ने "संबंधों में बाधाएं" पैदा की थीं। द हिंदू.कॉम के अनुसार, हालांकि अब व्यापार समझौते पर "कमोबेश" एक समझ बन गई है, अमेरिकी अदालतों द्वारा राष्ट्रपति ट्रंप के "पारस्परिक शुल्कों" को रद्द करने और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) द्वारा "धारा 301" जांच के आधार पर नए शुल्क लगाने से नई समस्याएं सामने आई हैं।
- पाकिस्तान के साथ अमेरिका के संबंध: श्री जयशंकर ने सीमा पार आतंकवाद को लेकर भारत की लंबे समय से चली आ रही चिंताओं पर प्रकाश डाला, जिसमें कहा गया कि "बहुत कम देश ऐसे हैं जिन्हें दशकों से एक पड़ोसी (पाकिस्तान) से जानबूझकर, सचेत नीति के तहत उस तरह के आतंकवाद का सामना करना पड़ा है जैसा हमें करना पड़ा है।" द हिंदू.कॉम के अनुसार, उन्होंने संकेत दिया कि इस मुद्दे पर अमेरिका की ओर से "समझ या सराहना या सहानुभूति" की कमी भारत के लिए एक समस्या पैदा करती है।
- अमेरिकी आव्रजन नीतियां: मंत्री ने कहा कि आव्रजन पर अमेरिकी घरेलू नीतियां भारत में जनमत के कारण द्विपक्षीय संबंधों को भी प्रभावित करती हैं। उन्होंने समझाया कि जहां गतिशीलता को कभी आर्थिक लाभ के रूप में देखा जाता था, वहीं "आज गतिशीलता का अर्थशास्त्र और गतिशीलता की राजनीति एक-दूसरे के विपरीत हैं, कम से कम कुछ हलकों में।" उन्होंने आगे कहा कि यह असमानता "निश्चित रूप से [भारत में] जनधारणा में एक मुद्दा है।" द हिंदू.कॉम के अनुसार, श्री जयशंकर ने ये टिप्पणियां सोमवार, 28 सितंबर, 2026 को एशिया सोसाइटी के विशिष्ट फेलो डैनियल रसेल के साथ बातचीत में कीं।
भारत-अमेरिका संबंधों के लिए निहितार्थ
रूस और ईरान के खिलाफ नया अमेरिकी प्रतिबंध कानून, विशेष रूप से रूसी तेल आयात करने वाले देशों से आने वाले सामानों पर संभावित 100% शुल्क लगाने का उसका जनादेश, भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव का एक महत्वपूर्ण बिंदु है। अमेरिकी प्रशासन और कांग्रेस के विभिन्न स्तरों पर अपनी चिंताओं को व्यक्त करने के भारत के लगातार प्रयास उसकी ऊर्जा सुरक्षा और व्यापक आर्थिक हितों के लिए स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हैं। ये चर्चाएं व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की जटिल प्रकृति को भी उजागर करती हैं, जो सहयोग के क्षेत्रों के बावजूद, व्यापार, क्षेत्रीय सुरक्षा और आव्रजन नीतियों पर विशिष्ट असहमतियों को दूर करना जारी रखती है।
आगे क्या होगा
द हिंदू.कॉम के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए घनिष्ठ जुड़ाव बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की है। आगे देखते हुए, प्रधानमंत्री मोदी 14-15 दिसंबर को फ्लोरिडा की यात्रा पर जाने वाले हैं, ताकि जी20 शिखर सम्मेलन में भाग ले सकें, जिसकी मेजबानी राष्ट्रपति ट्रंप करेंगे। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यह पुष्टि करना अभी जल्दबाजी होगी कि श्री मोदी, जो शिखर सम्मेलन से पहले कनाडा का भी दौरा करेंगे, जी20 बैठक के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे या नहीं। द हिंदू.कॉम के अनुसार, मुक्त व्यापार समझौते की वार्ताओं में प्रगति, जिसे अमेरिका कथित तौर पर तेजी से समाप्त करने के लिए उत्सुक है, उनकी सहभागिता की सीमा में एक निर्णायक कारक हो सकती है।






