राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की प्रदेश कार्यकारिणी समिति की बैठक सोमवार, 28 सितंबर को मुंबई के यशवंतराव चव्हाण केंद्र में आयोजित की गई। यह बैठक मुख्य रूप से महाराष्ट्र में सूखे की मौजूदा स्थिति पर केंद्रित रही, साथ ही महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) घोटाले और राज्य सूचना रजिस्टर (SIR) से जुड़े चल रहे विवाद पर भी चर्चाएँ हुईं।
बैठक के दौरान, विधायक रोहित पवार ने सूखे की स्थिति पर बात की और जनता से इस साल सादगी से दिवाली मनाने की अपील की। marathi.abplive.com के अनुसार, पवार ने राज्य सरकार को सूखा राहत उपायों के संबंध में 12 दिन का अल्टीमेटम भी जारी किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने सूखे की स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन करने के लिए राज्य के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया था।
SIR विवाद चर्चा का एक और महत्वपूर्ण बिंदु बनकर उभरा। द हिंदू के अनुसार, विधायक रोहित पवार ने दावा किया कि राज्य सूचना रजिस्टर के कारण तीन करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। यह आरोप महाराष्ट्र में चुनावी प्रक्रियाओं और डेटा प्रबंधन से संबंधित राजनीतिक विमर्श में एक और आयाम जोड़ता है।
MPSC घोटाला भी पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी द्वारा विचार-विमर्श किए गए महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक था। हालांकि MPSC घोटाले पर हुई चर्चा का विशिष्ट विवरण तुरंत उपलब्ध नहीं था, लेकिन एजेंडे में इसका शामिल होना पार्टी के लिए इसके महत्व को रेखांकित करता है, जैसा कि marathi.abplive.com ने बताया।
बैठक ने पार्टी के प्रमुख राज्य-स्तरीय चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करने को रेखांकित किया, जिसमें सूखे के कारण कृषि संकट, लोक सेवा भर्ती संबंधी चिंताएँ और मतदाता डेटा में संभावित अनियमितताएँ शामिल हैं। पवार द्वारा सादगी से दिवाली मनाने की अपील सूखे के प्रभाव की गंभीरता को दर्शाती है, विशेष रूप से राज्य भर के किसानों पर। सरकार को दिया गया 12 दिन का अल्टीमेटम सूखा राहत पर तत्काल कार्रवाई की मांग को इंगित करता है, जो राजनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना का सुझाव देता है यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर मांगें पूरी नहीं होती हैं।
राज्य सूचना रजिस्टर से जुड़े आरोप और बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने की संभावना, जैसा कि विधायक रोहित पवार ने दावा किया है और द हिंदू ने रिपोर्ट किया है, एक महत्वपूर्ण चुनावी चिंता की ओर इशारा करते हैं जिसके राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के लिए व्यापक निहितार्थ हो सकते हैं। पार्टी का इन मुद्दों पर अपनी प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में चर्चा करने का निर्णय महाराष्ट्र के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में उनकी कथित तात्कालिकता और महत्व पर जोर देता है।


