महिंद्रा ग्रुप और ब्राज़ीलियाई विमान निर्माता एम्ब्रेयर, भारत में C-390 मिलेनियम सैन्य परिवहन और हवाई ईंधन भरने वाले विमान के लिए एक औद्योगिक और सहायक पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने के लिए प्रारंभिक चर्चाएँ कर रहे हैं। यह जानकारी महिंद्रा ग्रुप द्वारा गुरुवार को जारी एक बयान में दी गई।
मनीकंट्रोल.कॉम, रॉयटर्स, बिजनेसलाइन और टेलीग्राफ इंडिया के अनुसार, दोनों कंपनियों ने भारत में एम्ब्रेयर C-390 मिलेनियम विमान के उत्पादन के लिए अंतिम असेंबली लाइन हेतु महाराष्ट्र के नागपुर को एक संभावित स्थान के रूप में चिह्नित किया है। यह कदम भारतीय वायु सेना (IAF) के मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) कार्यक्रम के लिए उनकी संयुक्त कोशिश का हिस्सा है।
प्रमुख घटनाक्रम और साझेदारी का विवरण
महिंद्रा ग्रुप ने बताया कि कंपनियाँ नागपुर में चिह्नित स्थान के संबंध में महाराष्ट्र सरकार के साथ काम कर रही हैं। प्रस्तावित सुविधा भारत में विमान की स्थानीय असेंबली और औद्योगीकरण का समर्थन करेगी, बशर्ते एम्ब्रेयर C-390 मिलेनियम को भारतीय सरकार द्वारा चुना जाए और IAF के MTA कार्यक्रम के तहत ऑर्डर दिया जाए।
एम्ब्रेयर और महिंद्रा ने पिछले साल अक्टूबर में IAF के MTA कार्यक्रम के लिए C-390 मिलेनियम को संयुक्त रूप से आगे बढ़ाने हेतु एक रणनीतिक सहयोग समझौते को औपचारिक रूप दिया था। बिजनेस-स्टैंडर्ड.कॉम के अनुसार, यह समझौता फरवरी 2024 में हस्ताक्षरित एक प्रारंभिक समझौते पर आधारित था। इस सहयोग का उद्देश्य भारत में औद्योगीकरण, स्थानीय विनिर्माण, असेंबली, आपूर्ति श्रृंखला विकास और रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (MRO) गतिविधियों को शामिल करना है।
फरवरी 2026 में, कंपनियों ने भारत में C-390 मिलेनियम MRO क्षमता स्थापित करने की दिशा में काम करने की योजना की भी घोषणा की, बशर्ते विमान को MTA कार्यक्रम के तहत चुना जाए, बिजनेस-स्टैंडर्ड.कॉम ने बताया।
महिंद्रा ग्रुप के ग्रुप एग्जीक्यूटिव बोर्ड के सदस्य विनोद सहाय ने कहा कि महिंद्रा भारत में एक विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी एयरोस्पेस पारिस्थितिकी तंत्र बनाने और ऐसी विनिर्माण और प्रौद्योगिकी क्षमताएँ विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है जो देश की आत्मनिर्भर भारत की आकांक्षाओं में योगदान दें। बिजनेस-स्टैंडर्ड.कॉम के अनुसार, सहाय ने कहा, "जैसे-जैसे हम C-390 मिलेनियम पर एम्ब्रेयर के साथ काम कर रहे हैं, हम कार्यक्रम को बड़े पैमाने पर समर्थन देने के लिए आवश्यक औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार कर रहे हैं। नागपुर ऐसी क्षमता के लिए एक आकर्षक अवसर प्रदान करता है।"
सहाय ने यह भी बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने नागपुर में "तेजी से" भूमि आवंटित की है और संबंधित आवश्यकताओं में सहायता कर रही है। कंपनियाँ राज्य सरकार के साथ मिलकर काम कर रही हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यदि कार्यक्रम साझेदारी को दिया जाता है तो आवश्यक औद्योगिक बुनियादी ढाँचे को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।
प्रस्तावित नागपुर सुविधा का उद्देश्य विमान असेंबली, सिस्टम एकीकरण, विनिर्माण इंजीनियरिंग और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला विकास से संबंधित जानकारी देश में लाना है। बिजनेस-स्टैंडर्ड.कॉम ने बताया कि कार्यक्रम मिलने पर, साझेदारी का इरादा भारतीय एयरोस्पेस कंपनियों को C-390 मिलेनियम पारिस्थितिकी तंत्र में धीरे-धीरे एकीकृत करना है ताकि विनिर्माण, आफ्टरमार्केट सेवाएँ, प्रशिक्षण और जीवनचक्र सहायता प्रदान की जा सके, जो भारत सरकार के 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' उद्देश्यों के अनुरूप है।
एम्ब्रेयर डिफेंस एंड सिक्योरिटी के अध्यक्ष और सीईओ बॉस्को दा कोस्टा जूनियर ने कहा कि एम्ब्रेयर महिंद्रा के साथ अपनी साझेदारी को गहरा करने में प्रसन्न है क्योंकि C-390 मिलेनियम की औद्योगिक क्षमताओं को भारत लाने की तैयारियाँ आगे बढ़ रही हैं। बिजनेस-स्टैंडर्ड.कॉम के अनुसार, उन्होंने कहा, "नागपुर को असेंबली सुविधा के लिए एक संभावित स्थान के रूप में पहचानना देश में एक मजबूत, दीर्घकालिक एयरोस्पेस पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में एक महत्वपूर्ण कदम है।"
बिजनेस-स्टैंडर्ड.कॉम ने बताया कि कोस्टा जूनियर ने महाराष्ट्र सरकार के समर्थन को भी स्वीकार किया और भारत की स्वदेशी एयरोस्पेस और रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए भागीदारों के साथ मिलकर काम करने की इच्छा व्यक्त की, "बशर्ते C-390 मिलेनियम को भारतीय वायु सेना कार्यक्रम के लिए चुना जाए।"
C-390 मिलेनियम के बारे में
बिजनेस-स्टैंडर्ड.कॉम के अनुसार, C-390 मिलेनियम को एक बहु-मिशन सैन्य परिवहन विमान के रूप में वर्णित किया गया है। इसे सैनिकों और कार्गो परिवहन, एयरड्रॉप संचालन, चिकित्सा निकासी, खोज और बचाव, अग्निशमन और मानवीय मिशन सहित कई प्रकार के मिशनों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
विमान की पेलोड क्षमता 26 टन तक है और इसे अस्थायी या कच्ची हवाई पट्टियों से संचालित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। बिजनेस-स्टैंडर्ड.कॉम ने बताया कि प्रस्तावित औद्योगीकरण कार्यक्रम एम्ब्रेयर की एयरोस्पेस इंजीनियरिंग और विमान विनिर्माण विशेषज्ञता का लाभ उठाएगा, साथ ही महिंद्रा की स्थापित विनिर्माण क्षमताओं और व्यापक भारतीय औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का भी उपयोग करेगा।
भविष्य की संभावनाएँ
बिजनेस-स्टैंडर्ड.कॉम के अनुसार, कंपनियाँ भारतीय सरकार, भारतीय एयरोस्पेस पारिस्थितिकी तंत्र और महाराष्ट्र सरकार के साथ बातचीत जारी रखेंगी जैसे-जैसे वे कार्यक्रम की तैयारी आगे बढ़ाएँगे।
बिजनेस-स्टैंडर्ड.कॉम के अनुसार, सहाय ने दोहराया, "ये तैयारियाँ, निश्चित रूप से, भारतीय सरकार द्वारा C-390 मिलेनियम के चयन और IAF ऑर्डर दिए जाने पर निर्भर करती हैं।"






