tv9marathi.com की एक रिपोर्ट के अनुसार, धनतेरस और दिवाली के त्योहारी सीज़न से पहले सोने की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट आने की उम्मीद है, जिससे उपभोक्ताओं को संभावित राहत मिल सकती है। यह अनुमान एचएसबीसी बैंक के पूर्वानुमानों पर आधारित है, जो आने वाले वर्षों में औसत सोने की कीमतों में कमी का संकेत देते हैं।
कीमतों में अपेक्षित गिरावट का कारण वैश्विक अनिश्चितताएं और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि को बताया गया है, ऐसे कारक जिन्होंने हाल के महीनों में सोने और चांदी दोनों की दरों में सामान्य कमी में योगदान दिया है।
संशोधित मूल्य पूर्वानुमान
tv9marathi.com द्वारा उद्धृत रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, एचएसबीसी बैंक ने 2026 के लिए अपने औसत सोने की कीमत के पूर्वानुमान को घटाकर 4,490 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस कर दिया है। भारत में, यह कीमत लगभग 1,48,624 रुपये होने की उम्मीद है।
2027 के लिए, एचएसबीसी ने अपने औसत मूल्य अनुमान को और घटाकर 4,825 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस कर दिया है। tv9marathi.com की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में यह लगभग 1,59,724 रुपये प्रति 10 ग्राम होगा।
ये संशोधित पूर्वानुमान बताते हैं कि जहां इस साल, खासकर दिवाली से पहले, सोना अधिक किफायती हो सकता है, वहीं अगले साल कीमतों में वृद्धि देखी जा सकती है।
बाजार की मौजूदा स्थिति
tv9marathi.com के अनुसार, विश्व स्तर पर, सोने का हाजिर भाव 4,184.45 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था, जिसमें पिछले सप्ताह दो प्रतिशत की कमी आई थी। पिछले दिन, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,165.29 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर दर्ज किया गया था।
चांदी का मौजूदा वैश्विक बाजार मूल्य 61.18 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस है।
भारत में, चल रहे त्योहारी सीज़न के दौरान, tv9marathi.com द्वारा दिल्ली में सोने और चांदी की कीमतें इस प्रकार बताई गईं:
- 24 कैरेट सोना: 1,53,314 रुपये प्रति 10 ग्राम
- 22 कैरेट सोना: 1,41,141 रुपये प्रति 10 ग्राम
- 18 कैरेट सोना: 1,15,563 रुपये प्रति 10 ग्राम
दिल्ली में चांदी की कीमतें 2,35,000 रुपये और 2,51,900 रुपये के बीच बताई गईं।
बाजार पर प्रभाव और निवेशक दृष्टिकोण
सोने की कीमतों में रिकॉर्ड ऊंचाई से आई गिरावट मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि से प्रभावित हुई है। हालांकि, संयुक्त राज्य अमेरिका में हाल के घटनाक्रमों ने भी इसमें भूमिका निभाई है।
अमेरिका में कमजोर होते मुद्रास्फीति के आंकड़ों के कारण फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में बढ़ोतरी की उम्मीद कम हो गई है। भावना में इस बदलाव ने पिछले दो कारोबारी सत्रों में सोने की कीमतों में वृद्धि में योगदान दिया है।
निवेशक वर्तमान में आगामी अमेरिकी पेरोल डेटा पर नज़र रख रहे हैं ताकि आर्थिक रुझानों के आगे के संकेतों का पता चल सके जो कीमती धातु बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।
खरीदारों और केंद्रीय बैंकों के लिए निहितार्थ
त्योहारी अवधि से पहले सोने की कीमतों में अपेक्षित कमी से भारत में उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर मिलने की उम्मीद है, जहां धनतेरस और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान सोने और चांदी की खरीद एक गहरी जड़ें जमा चुकी परंपरा है। यह कीमती धातुओं में निवेश करने वाले खरीदारों को काफी राहत प्रदान कर सकता है।
इसके अलावा, tv9marathi.com ने बताया कि यदि सोने की कीमतें लगभग 4,000 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस तक गिर जाती हैं, तो विश्व स्तर पर केंद्रीय बैंक सोने की खरीद शुरू कर सकते हैं। ऐसा परिदृश्य अन्य माध्यमों से सोने में बढ़े हुए निवेश को भी प्रोत्साहित कर सकता है।






